Safar Kitabon Ka – फ़रवरी दो हज़ार तीस | Parul Singh
कभी-कभी किसी किताब का नाम ही आपको उसके भीतर झाँकने के लिए मजबूर कर देता है। “फ़रवरी दो हज़ार तीस” भी ऐसा ही एक नाम है।
Parul Singh ji का यह कविता-संग्रह पढ़ते हुए लगा कि ये कविताएँ सिर्फ़ शब्दों और भावनाओं का सिलसिला नहीं हैं, बल्कि हमारे आज, हमारी स्मृतियों और आने वाले कल के बीच एक ख़ामोश संवाद हैं।
फ़रवरी—जो अपने आप में एक छोटा-सा मौसम है…
और दो हज़ार तीस—एक ऐसा भविष्य, जिसे हम अभी देख नहीं पाए हैं।
इन कविताओं में प्रेम है, रिश्ते हैं, इंतज़ार है, अकेलापन है और जीवन को थोड़ा ठहरकर देखने की कोशिश भी।
कुछ कविताएँ पढ़कर लगता है कि कवि हमसे बात कर रहा है… और कुछ ऐसी हैं जिन्हें पढ़कर लगता है कि हम ख़ुद से ही बात कर रहे हैं।
“फ़रवरी दो हज़ार तीस”, Parul Singh ji का एक संवेदनशील कविता-संग्रह है—जिसे पढ़ना शायद किसी मंज़िल तक पहुँचना नहीं, बल्कि अपने भीतर से होकर गुज़रने जैसा है।
Safar Kitabon Ka में इस बार सफ़र इसी किताब के साथ।
किताब ख़रीदने के लिए:
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