Safar Kitabon Ka – फ़रवरी दो हज़ार तीस | Parul Singh
कभी-कभी किसी किताब का नाम ही आपको उसके भीतर झाँकने के लिए मजबूर कर देता है। “फ़रवरी दो हज़ार तीस” भी ऐसा ही एक नाम है। Parul Singh ji का यह कविता-संग्रह पढ़ते हुए लगा कि ये कविताएँ सिर्फ़ शब्दों और भावनाओं का सिलसिला नहीं हैं, बल्कि हमारे आज, हमारी स्मृतियों और आने वाले कल…